भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों की टक्कर के बाद भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक को तलब किया

अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के बीच टक्कर की घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।

भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों की टक्कर के बाद भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक को तलब किया
तस्वीर साभार: Unsplash

1.घटनाक्रम और विदेश मंत्रालय की आपत्ति

Reuters और The Tribune India की रिपोर्टों के अनुसार, अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय समुद्री जलक्षेत्र में भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक जहाजों के बीच टक्कर की एक गंभीर घटना सामने आई है। घटना के तुरंत बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के वरिष्ठ राजनयिक/प्रभारी को तलब कर औपचारिक रूप से कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारतीय पक्ष ने इसे समुद्री नेविगेशन सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों का गंभीर उल्लंघन करार दिया है।

2.आईएनएस त्रिशूल और पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज की टक्कर

प्राथमिक विवरणों के मुताबिक, भारतीय नौसेना का फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल अरब सागर में नियमित समुद्री गश्त और निगरानी अभियान पर तैनात था। इसी दौरान पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज के साथ निकट संपर्क की स्थिति बनी, जिसके परिणामस्वरूप दोनों इकाइयों के बीच टक्कर हुई। रक्षा सूत्रों के अनुसार, घटना में किसी भी पक्ष के किसी नौसैनिक को गंभीर चोट नहीं आई है, हालांकि जहाजों की बाहरी संरचना को पहुंचे नुकसान का तकनीकी आकलन किया जा रहा है।

3.अरब सागर में रणनीतिक संदर्भ और नेविगेशन प्रोटोकॉल

अरब सागर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील समुद्री जलमार्ग है जहां अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों, तेल टैंकरों और दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों की नियमित आवाजाही रहती है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अंतर्गत COLREGs (समुद्र में टकराव रोकने के अंतरराष्ट्रीय नियम) के तहत जहाजों के बीच सुरक्षित दूरी, गति और प्राथमिकता के सख्त नियम लागू होते हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि गैर-जिम्मेदाराना युद्धाभ्यास किसी बड़ी समुद्री त्रासदी का कारण बन सकता था।

4.राजनयिक असर और आगे की राह

यह घटना ऐसे समय में घटी है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत ठप है। भारत ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौपरिवहन सुरक्षा के स्थापित प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है और पाकिस्तानी पक्ष से घटना की आंतरिक जांच की मांग की है। नौसैनिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के नौसेना संचालन महानिदेशकों (DGNO) के बीच स्थापित संपर्क तंत्र के जरिए भविष्य में ऐसी आपात स्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने पर बल दिया जाना चाहिए।